मालदीव कैसे बना हिन्दू से मुस्लिम राष्ट्र, बिहार और गुजरात का क्या कनेक्शन?

मालदीव हिंद महासागर में स्थित एक दीप समूह देश है। मालदीव का कुल क्षेत्रफल समुद्र सहित लगभग 90000 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है लेकिन सभी दीपों का भूमि क्षेत्रफल मात्र 298 वर्ग किलोमीटर है। मालदीव में लगभग 200 टापू है जो अपनी सुंदरता के लिए विश्व प्रसिद्ध है। मालदीव में गहरे समुद्र, उथले तट, और चट्टान पारिस्थितिकी तंत्र सहित विभिन्न निवास स्थान है। यहां की कुल जनसंख्या लगभग 557751 की है जो इसे एशिया का पहला सबसे कम आबादी वाला देश बनाता है।

जाने मालदीव और भारत के संबंध

बात करें भारत और मालदीव के संबंध की तो पिछले कई वर्षों से भारत और मालदीव के संबंध गहरे रहे हैं। लेकिन मालदीव में पिछले साल राष्ट्रपति चुनाव हुआ और पिछली सरकार इब्राहिम सोलीह को हटा मोहम्मद मोइजु मालदीव के राष्ट्रपति बने। इस चुनाव में भारत विरोधी अभियान एक लोकप्रिय मुद्दा बन गया। चुनाव से पहले मोइजु ” इंडिया आउट ” कैंपेन का नेतृत्व किया। मोइजु वोटरों से यह भी वादा किया कि अगर वह सत्ता में आएंगे तो मालदीव की जमीन से भारतीय सैनिकों को हटाएंगे। ऐसा करके मोइजु चीन के साथ मजबूत संबंधों के संकेत भारत को दे दिया था। हालांकि भारत ने स्पष्ट तौर पर मालदीव की नई सरकार से कहा कि वह भारतीय सैनिकों की मौजूदगी को सही संदर्भ में देखें।

मोइजु चुनाव जीतने के बाद मालदीव के आठवें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली और उन्होंने पहले विदेश दौरा तुर्की का किया। ऐसा करके मोइजु ने एक परंपरा तोड़ी क्योंकि इससे पहले मालदीव का नया राष्ट्रपति पहला विदेशी दौरा भारत का करता था। इन दिनों चीन के इशारे पर मालदीव भारत के खिलाफ जहर उगल रहा है। मालदीव अपने इतिहास और बुरे वक्त को भूल रहा है मालदीव को जब भी आवश्यकता की जरूरत पड़ी है भारत सबसे पहले इस छोटे से द्वीप देश के समक्ष खड़ा रहा है। बात करें 2004 की मालदीव में सुनामी और दिसंबर 2014 जल संकट के दौरान सहायता करने वाला पहला देश भारत रहा था। मालदीव में भारत पर्यटकों के सबसे बड़े स्रोतों में से एक है वर्ष 2023 में सर्वाधिक पर्यटक भेजने वाला देश भारत रहा जिसकी बाजार हिस्सेदारी लगभग 11% की थी।

जाने मालदीव की पूरी इतिहास

कई विद्वानों का कहना है कि मालदीव का नाम संस्कृत शब्द मालादीपा मतलब दीपों का हार से उत्पन्न हुआ है जो लगभग पांचवीं शताब्दी ईसा पूर्व से बसा हुआ है। इतिहास वेदों का मानना है की सबसे पहले यहां बसने वाले लोग द्रविड़ थे। जो (BCE300-300CE) में केरल से यहां आए थे, जो शायद दक्षिण पश्चिम तट के मछुआरे थे। कई इतिहासकारों का यह भी तर्क है कि मालदीव में सबसे पहले सिहली लोगों का आगमन हुआ था, जो उत्तर पूर्व भारत के सिहपुरा नामक प्राचीन शहर से आए थे।

यहां बसने वाले लोग कौन से धर्म को मानते थे

12वीं शताब्दी तक मालदीव हिंदू राजाओं के अधीन रहा। अशोक सम्राट के प्रसार के समय बौद्ध धर्म मालदीव में आया और 12वीं शताब्दी तक मालदीव के लोगों का प्रमुख धर्म बना रहा। मालदीव का इस्लाम में परिवर्तन का उल्लेख प्राचीन आज्ञपत्रों में किया गया है। मालदीप 12वीं शताब्दी के मध्य यानी 1153 AD में इस्लाम में पूरी तरह से परिवर्तित हो गया था। इस तरह से मालदीव एक मुस्लिम देश के रूप में में स्थापित हुआ।

मालदीव की स्वतंत्रता

मालदीव 1887 में ब्रिटेन के अधीन चल गया। जिसे 1965 में आजाद कर इसकी बाग डोर 3 सालों के लिए मोहम्मद फरीद दीदी को सौंप दिया गया। 11 नवंबर 1968 को राजशाही समाप्त कर दी गई और मालदीव को एक गणतंत्र गणराज्य के रूप में स्थापित कर दिया गया। इसके बाद से ही मालदीव राजनीतिक अस्थिरता ,पीने योग्य पानी ,लोकतांत्रिक सुधार , जलवायु परिवर्तन जैसे चुनौतियों का सामना कर रहा है।

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